वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण: निवेश में हर संभव सुधार करेगी सरकार

सीतारमण ने कहा कि मैं निवेश के लिए आमंत्रित करने के साथ ही आश्वासन दे सकती हूं कि भारत सरकार विभिन्न क्षेत्रों में आगे सुधार के लिए प्रतिबद्ध है, चाहे वह बैंकिंग, खनन या बीमा क्षेत्र हो। वित्तमंत्री ने बुनियादी ढांचा विकास परियोजनाओं में निवेश के लिए स्वीडिश फर्मों को आमंत्रित किया।

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वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण

वित्तमंत्री : निवेश के हर संभव सुधार करेगी सरकार

देश में ज्यादा से ज्यादा निवेश लाने के लिए हम हर तरह के सुधार के लिए तैयार है। यह बात मंगलवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारत-स्वीडन बिजनेस समिट में कही। उन्होंने कहा कि सरकार ने सुधारों के लिए विभिन्न  कदम उठाए हैं, जिसमें कॉर्पोरेट टैक्स को कम करना भी शामिल है। सीतारमण ने कहा कि मैं निवेश के लिए आमंत्रित करने के साथ ही आश्वासन दे सकती हूं कि भारत सरकार विभिन्न क्षेत्रों में आगे सुधार के लिए प्रतिबद्ध है, चाहे वह बैंकिंग, खनन या बीमा क्षेत्र हो। वित्तमंत्री ने बुनियादी ढांचा विकास परियोजनाओं में निवेश के लिए स्वीडिश फर्मों को आमंत्रित किया।

100 लाख करोड़ का निवेशः

सीतारमण ने कहा कि हमारी योजना देश में अगले पांच वर्षों में बुनियादी ढांचा क्षेत्र में लगभग 100 लाख करोड़ रुपए के निवेश की है। उल्लेखनीय है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को पर्सनल इनकम टैक्स को कम करने के लिए
सांसदों से बात की और उनके सुझाव लिए। हालांकि, उनका कहना था कि इसमें कटौती का निर्णय इसके फायदों को ध्यान में रखते हुए ही लिया जाएगा।

मैट के मोर्चे पर राहतः

वहीं आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार ने मैट दरें लागू होने की तिथियों में तालमेल का अभाव दूर  कर लिया है। कम मैट दर 1 अप्रेल 2019 से लागू होगी, जो स्वागत योग्य 1 कदम है। तिथियों में मेल-जोल नहीं 5 होने से असमंजस की स्थिति पैदा हो गई थी और वित्त मंत्री के स्पष्टीकरण के बाद इसे दूर कर लिया गया है।

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घाटे में कमी

सीतारमण ने कहा, सदस्यों द्वारा राजकोषीय घाटे पर उठाई गई चिंता का मैं पूरा सम्मान करती हूं। कॉर्पोरेट करों में कमी किए जाने के बाद सरकार को करीब 1.45 लाख करोड़ रुपए राजस्व का मोह त्यागना होगा। सरकार संशोधित अनुमान जारी करने के समय राजकोषीय घाटे पर अंतिम निर्णय लेगी। सीतारमण ने कहा कि संप्रग- 12 के समय औसत  जकोषीय घाटा 5.5 प्रतिशत रहा था, जबकि मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में यह जीडीपी का 3.68 प्रतिशत रहा था।

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