मोदी ने ठुकराया RCEP समझौता !! जानिए क्या है वजह ?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने RCEP (Regional Comprehensive Economic Partnership) यानि की क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते में फ़िलहाल शामिल होने (या हस्ताक्षर करने) से मना कर दिया है और यह फैसला भारत (India) के आर्थिक और व्यापारिक हितों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

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आपको बता दें की बैंकाक (Bangkok) में ASEAN देशों की बैठक चल रही है और RCEP के सभी प्रस्तावित सदस्य देश भी इसमें हिस्सा ले रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इसी बैठक में हिस्सा लेने के लिए बैंकाक में हैं। सोमवार को भारत ने इस समझौते में अपने हस्ताक्षर करने से तब तक मना किया है जब तक की पुराने अहम् मुद्दों को सुलझा नहीं लिया जाता। हालाँकि इस वार्ता में शामिल बाकि के 15 देश इस बड़े व्यापारिक समझौते पर 2020 में हस्ताक्षर करने को राजी हैं।

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कहा जा रहा है की इस समझौते में भारत के अभी शामिल नहीं होने का एक मुख्य कारण चीन के साथ असंतोषजनक व्यापारिक वार्ता और भारत का चीन के साथ 50 बिलियन डॉलर से ज्यादा का Trade Deficit (या व्यापर घाटा) है, और अगर भारत इस समझौते पे हस्ताक्षर करता तो इससे बाकि देशों और मुख्य रूप से चीन को ज्यादा फायदा होता क्योंकि भारत को ज्यादा वस्तुओं पे आयात शुल्क (टैरिफ) घटाना या हटाना पड़ता।

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अमेरिका (U.S.) से Trade War (व्यापार संघर्ष) के चलते चीन (China) को काफी नुकसान हो रहा है और वो अपनी भरपायी करने के लिए भारत समेत बाकि एसियाई देशों की तरफ देख रहा है। चीन को उम्मीद थी की भारत इस समझौते पे हस्ताक्षर कर देगा और वो भारत का बाजार चीनी सामान से भर देगा लेकिन इससे भारतीय मझोले और छोटे उद्योगों को ज्यादा नुकसान होता इसलिए प्रधानमंत्री मोदी ने दूरदर्शिता का परिचय देते हुए इस समझौते पे फ़िलहाल हस्ताक्षर करने से मना कर दिया है ।

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क्या है RCEP या क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी??
द रीजनल कॉम्प्रिहेंसिव इकनोमिक पार्टनरशिप या क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी एक तरह का व्यापारिक समझौता है जिसके लिए 16 देशों के बीच वार्ता चल रही है। इसमें ASEAN ( Association of South East Asian Nation) या आसिआन के सभी 10 सदस्य देश (ब्रूनेई, कम्बोडिआ, इंडोनेशिया, लाओस, मलेसिया, म्यांमार, फिलिपींस, सिंगापुर, थाईलैंड और वियतनाम) और 6 अन्य देश (इंडिया, ऑस्ट्रेलिया, जापान, कोरिया, चीन और न्यूज़ीलैण्ड ) शामिल हैं। इस समझौते का मकसद एक ऐसा एकीकृत (इंटीग्रेटेड) या संयुक्त बाजार बनाना जो की सभी 16 देशों में फैला हो और किसी भी देश का कोई भी उत्पाद या सेवा (इंग्लिश) इस पुरे एकीकृत क्षेत्र या बाजार में आसानी से उपलब्ध हो। RCEP अब तक का सबसे बड़ा क्षेत्रीय व्यापार समझौता है, हालाँकि अभी भी इसमें शामिल सभी देश (जिनकी संयुक्त जनसंख्या विश्व की कुल जनसंख्या की आधी है) विश्व के कुल निर्यात का एक चौथाई ही निर्यात करते हैं और विश्व की जीडीपी (world GDP) में इनकी भागीदारी लगभग 30 प्रतिशत ही है।

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